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रामकृष्ण परमहंस एवं स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंदजीने देवी जगदंबामाताके पास केवल ‘ज्ञान, भक्ति एवं वैराग्य' की मांग की थी । यह क्यूं किया, इसका स्पष्टीकरण देते हुए स्वामी विवेकानंदजी कहते हैं,
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शिष्यकी परीक्षा
रामानुजाचार्य शठकोपस्वामीजीके शिष्य थे । स्वामीजीने रामानुजजीको ईश्वरप्राप्तिका रहस्य बताया था । परंतु उसे किसीको न बतानेका निर्देश दिया था; किंतु रामानुजजीने अपने गुरुकी इस आज्ञाको नहीं माना..
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शिवाजी महाराजकी गुरुभेंट
समर्थ रामदास स्वामीजीकी ख्याति सुननेपर छ.शिवाजी महाराजको उनके दर्शनकी लालसा निर्माण हुई । उनसे मिलनेके लिए वे कोंढवळको गए । वहां भेट होगी इस आशासे सायंकालतक रुके, तब भी महाराजकी स्वामीजीसे भेंट नहीं हुई ।
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ब्राह्मणकी दरिद्रता गुरुकृपासे गई !
बालमित्रो, अक्कलकोटके स्वामी समर्थजी भगवान दत्तात्रेयके तीसरे अवतार हैं । उन्होंने अनेक भक्तोंपर कृपा की है ।
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श्रीगुरुकी आज्ञापालनहेतु स्वयंको झोंक देनेवाला शिष्य आरुणी !
प्राचीन समयमें धौम्य नामक मुनिका एक आश्रम था । उस आश्रममें उनके अनेक शिष्य विद्याभ्यासके लिए रहते थे । उनमें आरुणी नामक एक शिष्य था । एक समय धुंआधार वर्षा होने लगी ।
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