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लोकमान्य तिलक !
‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है तथा मैं वह अवश्य प्राप्त करूंगा’ इस सुपरिचित वाक्यके कारण हम उन्हें ‘लोकमान्य\\'के नामसे जानते हैं; परंतु तिलकजीकी वृत्ति बाल्यावस्थासे ही निर्भयी एवं तेजस्वी किस प्रकार थी, यह हम इस कथासे समझ लेते हैं ।
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जोर से हंसे भगतसिंह
भगतसिंह जेलमें थे । एक दिन भगतसिंहके परिजन उनसे मिलने लाहौर गए । भगतसिंहको बैरकसे बाहर लाया गया । उनके साथ पुलिस अफसर सहित कई जवान थे ।
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किशोरावस्थासे ही राष्ट्राभिमानी वृत्तिके नेताजी सुभाषचंद्र बोस !
एक बार शरद ऋतुमें मूसलाधार वर्षा हो रही थी । आधी रातमें मां प्रभावतीदेवी की नींद खुली, तो उन्हें सुभाषकी चिंता होने लगी ।
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मेरे पास भयंकर शस्त्र है । - स्वातंत्र्यवीर सावरकर
‘एक समय लंदनमें गुप्तचरोंने स्वा. सावरकरजी को जांच-पडतालके लिए रोका और कहा, ‘‘महाशय, क्षमा कीजिए, हमें आपपर शंका है ।
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दृढ निश्चयी विवेकानंद
जयपुरमें स्वामी विवेकानंद पाणिनीका संस्कृत व्याकरण सीखने हेतु एक प्रसिद्ध संस्कृत पंडितके यहां जाते थे ।
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